वृंदासखी | Vrindasakhi Foundation — ब्रज सेवा, वृन्दावन
वृंदासखी
VRINDASAKHI FOUNDATION · VRINDAVAN
🌿 ब्रज सेवा — वृन्दावन धाम

वृंदासखी

Vrindasakhi Foundation · Vrindavan

वृन्दावन की हर लता, पेड़, और पत्ती हमारी सखी है —
यमुना माता की सेवा और ब्रज की हरियाली यही हमारा धर्म है।

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तुलसी कदम्ब ~ यमुना माता ~
हमारे बारे में

हम ब्रज के सखा हैं

वृंदासखी — यह नाम ही हमारी पहचान है। संस्कृत में 'वृंदा' तुलसी और वृन्दावन की अधिष्ठात्री देवी का नाम है, और 'सखी' अर्थ है सखी — प्रेम से भरी साथी। हम वृन्दावन की प्रत्येक लता, पेड़ और पत्ती को अपनी सखी मानते हैं।

हमारा संकल्प है ब्रज की उस प्राकृतिक हरियाली को पुनः जागृत करना जिसमें श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं कीं — एक पेड़ लगाकर, एक घाट साफ करके, एक कदम आगे बढ़कर।

🌿 पेड़-पौधा सेवा 🛕 ब्रज प्रेम 💧 यमुना सेवा 📍 वृन्दावन, मथुरा ☀️ पर्यावरण जागरूकता
🌳 हर पेड़ हमारी सहचरी — सखी
🙏 सेवा भाव से, बिना स्वार्थ के
🌊 यमुना स्वच्छता हमारा संकल्प
💚 ब्रज हरियाली — हमारा सपना
ब्रज दर्शन
वृन्दावन में जो वृक्ष हैं, वे साधारण वृक्ष नहीं —
वे कल्पवृक्ष हैं, कृष्ण की लीलाओं के साक्षी हैं।

— ब्रह्म संहिता ५.२९ पर आधारित, श्रील प्रभुपाद

"वृक्षों के समान सहिष्णु बनो —
जो उसकी डालें काटे, उसे भी छाया दो।"

— श्री चैतन्य महाप्रभु (शिक्षाष्टकम् — तृणादपि सुनीचेन)

संतों के वचन — ब्रज महिमा

जिन संतों ने वृन्दावन को जीया

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वृन्दावन के जंगल में आकर वे 'श्यामा-कुंज बिहारी' की नित्य लीला का ध्यान करते हुए भजन में खोए रहते थे। निधिवन के हर वृक्ष में उन्हें राधा-कृष्ण की लीला दिखती थी।

स्वामी हरिदास जी (१४७८–१५७३ ई.) निधिवन, वृन्दावन — बाँके बिहारी के प्रकट करनेवाले संत। बाँके बिहारी मंदिर उन्हीं के तपोबल से स्थापित हुआ।
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वृन्दावन में आकर चैतन्य महाप्रभु वनों में विचरण करते हुए हर पेड़ को आलिंगन देते, हर लता-पत्र को राधा-कृष्ण का रूप मानकर प्रेमाश्रु बहाते थे। यमुना तट पर ताड़ वृक्ष के नीचे बैठकर वे घण्टों समाधिस्थ रहते।

श्री चैतन्य महाप्रभु (१४८६–१५३४ ई.) चैतन्य चरितामृत के अनुसार, सन् १५१५ में उन्होंने वृन्दावन की खोई हुई लीला-स्थलियाँ पुनः प्रकट कीं।
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प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृंदावन ऐन ॥
— वृन्दावन का सच्चा प्रेम तभी मिलता है जब हम उसकी सेवा में समर्पित हों। यमुना तट पर विचरण, वनों की सेवा — यही वृन्दावन-रस की पहली शर्त है।

श्री हित ध्रुवदास जी (१५५०–१६०० ई.) वृन्दावन सतलीला, श्लोक १ — राधावल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख संत
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वृन्दावन के सभी वृक्ष वास्तव में कल्पवृक्ष हैं। ये साधारण वृक्ष नहीं — ये असंख्य दिव्य प्रेम-फल देते हैं। जो भक्त इन वृक्षों की सेवा करता है, उसे कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

श्रील प्रभुपाद (१८९६–१९७७ ई.) ब्रह्म संहिता ५.२९ की व्याख्या — "सर्बभोग वृक्ष जो ब्रज में हैं वे दिव्य प्रेम-फल देते हैं।"
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वृन्दावन में हम छुट्टी मनाने नहीं आते — हम यहाँ सेवा करने आते हैं। यमुना माता, ब्रज के वन, कुंड और मंदिर — इनकी सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है।

राधानाथ स्वामी ISKCON — "We come to Vrindavan not to enjoy a vacation, but we come here to serve."
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वृन्दावन का नाम ही 'वृंदा वन' है — तुलसी माता के वन से। यहाँ की प्रत्येक मिट्टी, प्रत्येक तृण, प्रत्येक पत्ता पवित्र है। इसे साफ रखना, हरा-भरा रखना — यह श्री राधारानी की सेवा है।

वृंदासखी फाउंडेशन — सेवा दर्शन वृन्दावन का शाब्दिक अर्थ: वृंदा (Ocimum tenuiflorum — तुलसी) + वन (वन/जंगल)
हमारी यात्रा

वृंदासखी — कौन हैं हम

वृंदासखी फाउंडेशन एक ब्रज-सेवा संस्था है जो वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। हम ब्रजवासी हैं — यह भूमि हमारी माँ है, यमुना हमारी जीवनदायिनी है, और यहाँ के वृक्ष हमारे परिवार।

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हमारा नाम — वृंदासखी

'वृंदा' = तुलसी माता / वृन्दावन की अधिष्ठात्री। 'सखी' = प्रेम से भरी सहचरी। हम वृन्दावन की हर लता-पत्ती को अपनी सखी मानते हैं।

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ब्रज की प्राकृतिक विरासत

वृन्दावन के वनों में कभी तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल और चंपा के हजारों वृक्ष थे। श्रीकृष्ण ने इन्हीं वनों में अपनी लीलाएं कीं। आज उन वनों को पुनः हरा-भरा करना हमारा धर्म है।

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यमुना और घाट-सेवा

यमुना माता ने ब्रज को जीवन दिया। उनके घाटों की सफाई, जल-प्रदूषण के प्रति जागरूकता और परिक्रमा मार्ग की स्वच्छता — यह हमारी दूसरी प्रमुख सेवा है।

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समुदाय से जुड़ाव

ब्रजवासी, तीर्थयात्री, बच्चे, और देश-विदेश के भक्त — सभी मिलकर ब्रज को हरा-भरा और पवित्र बना सकते हैं। हम एक साथ हैं।

हमारा संकल्प

वृंदासखी फाउंडेशन की स्थापना इस विश्वास पर हुई कि ब्रज की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।

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पेड़ सेवा: तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल — ब्रज की देशी वृक्ष प्रजातियों का रोपण और पालन।

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यमुना सेवा: नियमित घाट सफाई, प्लास्टिक मुक्त ब्रज अभियान, और जागरूकता।

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परिक्रमा सेवा: वृन्दावन और ब्रज की 84 कोस परिक्रमा मार्ग को स्वच्छ और सुंदर रखना।

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वृक्ष गोद योजना: हर पेड़ को एक नाम, एक सखी — ताकि लोग उसे अपना मानें।

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शिक्षा और जागरूकता: बच्चों और स्थानीय समुदाय को पर्यावरण सेवा का महत्व सिखाना।

पहली सेवा

पेड़ लगाना और पालना

ब्रज की भूमि पर हर पेड़ एक सहचरी है। हम पेड़ लगाते हैं, उनकी देखभाल करते हैं — जब तक वे खुद मजबूत न हो जाएं। तुलसी से कदम्ब तक, बरगद से पीपल तक — हर वृक्ष ब्रज की शोभा है।

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पौध रोपण अभियान

ब्रज की पावन भूमि में नियमित वृक्षारोपण — तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल और अन्य देशी प्रजातियाँ।

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पेड़ की देखभाल (सखी सेवा)

हर लगाए गए पेड़ की तब तक निगरानी जब तक वह पूरी तरह बड़ा न हो — सींचना, खाद देना, रक्षा करना।

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मंदिर-परिसर हरियाली

वृन्दावन के मंदिरों और परिक्रमा मार्ग पर छायादार वृक्ष लगाकर तीर्थयात्रियों को सुकून देना।

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वृक्ष नामकरण (गोद लें)

हर पेड़ को एक नाम, एक पहचान — ताकि आप उसे अपनी सखी मानकर उसकी रक्षा करें।

कदम्ब — कृष्ण-लीला का वृक्ष
दूसरी सेवा

ब्रज स्वच्छता सेवा

यमुना माता के घाटों की सफाई और ब्रज की समग्र स्वच्छता — यह हमारा दूसरा संकल्प है। एक साफ ब्रज ही कृष्ण को प्रिय है।

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यमुना घाट सफाई

नियमित यमुना घाटों की सफाई — प्लास्टिक, कचरा हटाना और श्रद्धालुओं में जागरूकता फैलाना।

🧹

परिक्रमा मार्ग सेवा

ब्रज की ८४ कोस परिक्रमा और वृन्दावन परिक्रमा मार्ग को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना।

♻️

जागरूकता अभियान

स्थानीय दुकानदारों, श्रद्धालुओं और बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाना — पर्यावरण शिक्षा।

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प्राकृतिक सौंदर्य संरक्षण

ब्रज की नदियों, कुंडों और वनों को प्रदूषण से बचाना — पारंपरिक पर्यावरण संरक्षण।

~ यमुना माता की सेवा ~
💧 हमारा संकल्प

यमुना को निर्मल बनाना
हमारा धर्म है

यमुना ने ब्रज को जीवन दिया है। हम संकल्पित हैं कि उनके घाटों को स्वच्छ रखेंगे, उनके जल को श्रद्धा से निहारेंगे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक निर्मल यमुना और हरा-भरा ब्रज छोड़कर जाएंगे।

सेवा में जुड़ें

हमसे जुड़िए

ब्रज सेवा सिर्फ हमारी नहीं — यह हम सबकी जिम्मेदारी है। चाहे आप एक पेड़ लगाना चाहते हों, घाट सफाई में हाथ बटाना चाहते हों, या बस जागरूकता फैलानी हो — हम आपका स्वागत करते हैं।

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पेड़ गोद लें — Adopt a Tree

एक पेड़ को अपनी सखी की तरह अपनाएं — उसे नाम दें, उसकी देखभाल करें।

🧹

स्वच्छता सेवा में भाग लें

हमारे मासिक यमुना घाट सफाई अभियान में शामिल हों।

📣

जागरूकता फैलाएं

अपने परिवार, मित्रों और समाज में ब्रज सेवा का संदेश पहुँचाएं।

🙏

सहयोग दें

आपके छोटे से सहयोग से हम अधिक पेड़ लगा सकते हैं, अधिक घाट साफ कर सकते हैं।

संपर्क करें

वृंदासखी फाउंडेशन, वृन्दावन (मथुरा), उत्तर प्रदेश
हम यहाँ हैं — बात करें, जुड़ें, सेवा करें।

✉️
ईमेल vrindasakhifoundation@gmail.com
📞
फ़ोन नंबर 1 +91 74550 05718
📱
फ़ोन नंबर 2 +91 63954 00802
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पता वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश