Vrindasakhi Foundation · Vrindavan
वृन्दावन की हर लता, पेड़, और पत्ती हमारी सखी है —
यमुना माता की सेवा और ब्रज की हरियाली यही हमारा धर्म है।
वृंदासखी — यह नाम ही हमारी पहचान है। संस्कृत में 'वृंदा' तुलसी और वृन्दावन की अधिष्ठात्री देवी का नाम है, और 'सखी' अर्थ है सखी — प्रेम से भरी साथी। हम वृन्दावन की प्रत्येक लता, पेड़ और पत्ती को अपनी सखी मानते हैं।
हमारा संकल्प है ब्रज की उस प्राकृतिक हरियाली को पुनः जागृत करना जिसमें श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं कीं — एक पेड़ लगाकर, एक घाट साफ करके, एक कदम आगे बढ़कर।
— ब्रह्म संहिता ५.२९ पर आधारित, श्रील प्रभुपाद
— श्री चैतन्य महाप्रभु (शिक्षाष्टकम् — तृणादपि सुनीचेन)
वृन्दावन के जंगल में आकर वे 'श्यामा-कुंज बिहारी' की नित्य लीला का ध्यान करते हुए भजन में खोए रहते थे। निधिवन के हर वृक्ष में उन्हें राधा-कृष्ण की लीला दिखती थी।
वृन्दावन में आकर चैतन्य महाप्रभु वनों में विचरण करते हुए हर पेड़ को आलिंगन देते, हर लता-पत्र को राधा-कृष्ण का रूप मानकर प्रेमाश्रु बहाते थे। यमुना तट पर ताड़ वृक्ष के नीचे बैठकर वे घण्टों समाधिस्थ रहते।
प्रीति रीति तब पाइयै, अरु वृंदावन ऐन ॥
— वृन्दावन का सच्चा प्रेम तभी मिलता है जब हम उसकी सेवा में समर्पित हों। यमुना तट पर विचरण, वनों की सेवा — यही वृन्दावन-रस की पहली शर्त है।
वृन्दावन के सभी वृक्ष वास्तव में कल्पवृक्ष हैं। ये साधारण वृक्ष नहीं — ये असंख्य दिव्य प्रेम-फल देते हैं। जो भक्त इन वृक्षों की सेवा करता है, उसे कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वृन्दावन में हम छुट्टी मनाने नहीं आते — हम यहाँ सेवा करने आते हैं। यमुना माता, ब्रज के वन, कुंड और मंदिर — इनकी सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है।
वृन्दावन का नाम ही 'वृंदा वन' है — तुलसी माता के वन से। यहाँ की प्रत्येक मिट्टी, प्रत्येक तृण, प्रत्येक पत्ता पवित्र है। इसे साफ रखना, हरा-भरा रखना — यह श्री राधारानी की सेवा है।
वृंदासखी फाउंडेशन एक ब्रज-सेवा संस्था है जो वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। हम ब्रजवासी हैं — यह भूमि हमारी माँ है, यमुना हमारी जीवनदायिनी है, और यहाँ के वृक्ष हमारे परिवार।
'वृंदा' = तुलसी माता / वृन्दावन की अधिष्ठात्री। 'सखी' = प्रेम से भरी सहचरी। हम वृन्दावन की हर लता-पत्ती को अपनी सखी मानते हैं।
वृन्दावन के वनों में कभी तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल और चंपा के हजारों वृक्ष थे। श्रीकृष्ण ने इन्हीं वनों में अपनी लीलाएं कीं। आज उन वनों को पुनः हरा-भरा करना हमारा धर्म है।
यमुना माता ने ब्रज को जीवन दिया। उनके घाटों की सफाई, जल-प्रदूषण के प्रति जागरूकता और परिक्रमा मार्ग की स्वच्छता — यह हमारी दूसरी प्रमुख सेवा है।
ब्रजवासी, तीर्थयात्री, बच्चे, और देश-विदेश के भक्त — सभी मिलकर ब्रज को हरा-भरा और पवित्र बना सकते हैं। हम एक साथ हैं।
वृंदासखी फाउंडेशन की स्थापना इस विश्वास पर हुई कि ब्रज की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।
पेड़ सेवा: तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल — ब्रज की देशी वृक्ष प्रजातियों का रोपण और पालन।
यमुना सेवा: नियमित घाट सफाई, प्लास्टिक मुक्त ब्रज अभियान, और जागरूकता।
परिक्रमा सेवा: वृन्दावन और ब्रज की 84 कोस परिक्रमा मार्ग को स्वच्छ और सुंदर रखना।
वृक्ष गोद योजना: हर पेड़ को एक नाम, एक सखी — ताकि लोग उसे अपना मानें।
शिक्षा और जागरूकता: बच्चों और स्थानीय समुदाय को पर्यावरण सेवा का महत्व सिखाना।
ब्रज की भूमि पर हर पेड़ एक सहचरी है। हम पेड़ लगाते हैं, उनकी देखभाल करते हैं — जब तक वे खुद मजबूत न हो जाएं। तुलसी से कदम्ब तक, बरगद से पीपल तक — हर वृक्ष ब्रज की शोभा है।
ब्रज की पावन भूमि में नियमित वृक्षारोपण — तुलसी, कदम्ब, पीपल, बरगद, बकुल और अन्य देशी प्रजातियाँ।
हर लगाए गए पेड़ की तब तक निगरानी जब तक वह पूरी तरह बड़ा न हो — सींचना, खाद देना, रक्षा करना।
वृन्दावन के मंदिरों और परिक्रमा मार्ग पर छायादार वृक्ष लगाकर तीर्थयात्रियों को सुकून देना।
हर पेड़ को एक नाम, एक पहचान — ताकि आप उसे अपनी सखी मानकर उसकी रक्षा करें।
यमुना माता के घाटों की सफाई और ब्रज की समग्र स्वच्छता — यह हमारा दूसरा संकल्प है। एक साफ ब्रज ही कृष्ण को प्रिय है।
नियमित यमुना घाटों की सफाई — प्लास्टिक, कचरा हटाना और श्रद्धालुओं में जागरूकता फैलाना।
ब्रज की ८४ कोस परिक्रमा और वृन्दावन परिक्रमा मार्ग को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना।
स्थानीय दुकानदारों, श्रद्धालुओं और बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाना — पर्यावरण शिक्षा।
ब्रज की नदियों, कुंडों और वनों को प्रदूषण से बचाना — पारंपरिक पर्यावरण संरक्षण।
यमुना ने ब्रज को जीवन दिया है। हम संकल्पित हैं कि उनके घाटों को स्वच्छ रखेंगे, उनके जल को श्रद्धा से निहारेंगे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक निर्मल यमुना और हरा-भरा ब्रज छोड़कर जाएंगे।
ब्रज सेवा सिर्फ हमारी नहीं — यह हम सबकी जिम्मेदारी है। चाहे आप एक पेड़ लगाना चाहते हों, घाट सफाई में हाथ बटाना चाहते हों, या बस जागरूकता फैलानी हो — हम आपका स्वागत करते हैं।
एक पेड़ को अपनी सखी की तरह अपनाएं — उसे नाम दें, उसकी देखभाल करें।
हमारे मासिक यमुना घाट सफाई अभियान में शामिल हों।
अपने परिवार, मित्रों और समाज में ब्रज सेवा का संदेश पहुँचाएं।
आपके छोटे से सहयोग से हम अधिक पेड़ लगा सकते हैं, अधिक घाट साफ कर सकते हैं।
वृंदासखी फाउंडेशन, वृन्दावन (मथुरा), उत्तर प्रदेश
हम यहाँ हैं — बात करें, जुड़ें, सेवा करें।